Thursday, 19 January 2017

เคชंเคšเคคंเคค्เคฐ : เคฌैเคฒ เค”เคฐ เคฎेเฅเค•

                       पंचतंत्र

                 बैल और मेढ़क 

एक बार एक तालाब के किनारे छोटे-छोटे मेढक खेल रहे थे। तभी वहाँ एक बैल पानी पीने के लिए आया। उसने पानी पीकर जोर से डकारा। बैल के डकारने की अवाज सुनकर सभी मेढक भयभीत हो गये। वे सरपट भागते हुए अपनी दादी माँ के पास पहुँचे।
दादी माँ ने अपने पोते से पूछा, क्यों रे, क्या हुआ? तुम लोग घबराए हुए क्यों हो?
छोटे मेढक ने कहा, अरे दादी, अभी एक बहुत बड़ा जानवर तालाब में पानी पीने आया था। उसकी आवाज बहुत ही तेज और भंयकर थी।
दादी माँ ने पूछा, कितना बड़ा था वह जानवर? नन्हे मेढक ने जवाब दिया, अरे, बहुत ही बड़ा था वह। दादी माँ ने अपने चारो पैर फैलाकर और गाल फुलाकर कहा, वह इतना बड़ा था, क्या? 
छोटे मेढक ने कहा, अरे नही दादी वह इससे भी बहुत बड़ा था। दादी माँ दादी ने फिर गाल पेट फुलाकर कहा इससे बड़ा तो नही होगा। है न!
नन्हे मेढक नें जवाब दिया, नही दादी वह इससे भी बहुत बहुत बड़ा था। दादी माँ ने अपने शारीर को और फुलाया। इस प्रकार वह अपने शरीर को फुलाती गई। आखिरकार उसका पेट फट गया और वह मर गई।

शिक्षा -थोथा अभिमान विनाश का कारण होता है।

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